Sunday, October 10, 2021
लघुकथा- बस जिंदगी ही तो बदली है..!
Sunday, June 27, 2021
उस रात जब स्कूटी का टायर पंक्चर हुआ था
तुम्हें हमेशा लगता है कि मैंने तुम्हारी बेस्ट फ्रेंड से तुम्हे दूर कर दिया, मुझे भी यही लगता है हमारे लिए। खैर वो मुझे इसलिए नहीं पसंद थी क्योंकि तुम उसे बहुत पसंद करती थी। तुम कह भी तो देती थी ना कि मैं उसके लिए तुम्हें छोड़ दूंगी तो क्यों पसंद करता मैं और सच मुझे उससे कोई दिक्कत नहीं थी, पर कभी अपना प्यार बंटता हुआ नहीं देख पाता था। मैं उसे पसंद नहीं करता था इसका मतलब ये भी नहीं था कि मैंने तुम्हें कभी रोका हो।
उस शाम को जब उसने तुम्हें अपने घर बुलाया था फैमिली झगड़े की वजह से मैं भी तो गया था ना तुम्हारे साथ। तुम्हें पता था कि मुझे बुखार है सिर में दर्द है, पर तुम्हारी खुशी से बढ़कर मेरे लिए कभी कुछ था भी नहीं। जो कर सकता था वो किया मैंने तुम्हारे चेहरे की चमक के लिए।
जब तुम मुझे घर छोड़कर जा रही थी तो रात के साढ़े दस बज रहे थे। विवेकानंद नगर से हापुड़ चुंगी तक सुनसान होता है मेरा मन नहीं कर रहा था कि तुम्हें जाने दूं, पर तुमने कहा कि चिंता की कोई बात नहीं रोज ही तो जाती हूं, मैंने भी सोचा हां रोज ही तो जाती हो, पर पता नहीं क्यों मन उस दिन मन खटका था। तुम चली गई। रोज की तरह मैं तब तक तुम्हें खड़ा होकर देखता रहा जब तक तुम्हारी स्कूटी आंखों से ओझल नहीं हो गई। जब तुम जा रही था तो एक कार थी तुम्हारे पीछे, तुम मुड़ी तो वो भी मुड़ी थी, सच कहूं मुझे उसी वक्त किसी अनहोनी का अंदेशा लग रहा था, पर मैं चुप रहा कि तुम कहोगी मैं पजेशिव ज्यादा हूं।
घर पर पहुंचकर बस कपड़े ही बदले थे और तुम्हारे फोन का इंतजार कर रहा था, पर अजीब सी बेचैनी थी तब से तुम्हारा मेरा फोन बजा। तुम थीं और बेतहाशा रोए जा रही थीं। उस वक्त बता नहीं सकता कि मेरी जान निकल गई थी। मुझे पक्का पता था कि कुछ गड़बड़ हो गई है। मैंने तुम्हें ढाढस दिया और निकल पड़ा था तुम्हारे पास। मेरे पास कोई गाड़ी नहीं थी और रात के ग्यारह बज गए थे वो एरिया और भी डरावना हो जाता है। पता है कोई पब्लिक व्हीकल नहीं मिला वहां दिन में नहीं मिलता तो वो तो रात थी। एक कार जा रही थी मैंने उनसे लिफ्ट मांगी उन्होंने कार रोकी, पर वो पिए हुए थे शायद या फिर बदमाश थे जो भी थे मुझे गंदी गंदी गालियां दिए जा रहे थे, हाथों में पिस्टल भी लहरा रहे थे या नहीं लहरा रहे थे अंधेरा था ठीक से कह नहीं सकता। खैर, उसी वक्त एक बाइक वाले ने मुझे लिफ्ट दे ही दी थी। बस ये लग रहा था कि किसी तरह तुम्हारे पास पहुच जाऊं।
हापुड़ चुंगी के इस तरफ उसने मुझे छोड़ा था, मैं लगभग दौड़ता हुआ तुम्हारे पास आया और मेरे आते ही जो तुमने मुझे भींचकर गले लगाया था और खूब रोई थी बता नहीं सकता कि मैं कैसा महसूस कर रहा था। तुम्हारे पास पहुंचने का सुकून कुछ ऐसा था कि जैसे उस वक्त सारी कायनात मुझे मिल गई हो। मुझे हमेशा यही लगता था कि मेरे रहते तुम्हे रत्ती भर भी आंच नहीं आने दूंगा। मैं चुप कराता जा रहा था और तुम हिचकियां बांधकर रोए जा रही थी। जी कर रहा था कि कस कर तुम्हें अपनी बांहों में छिपा लूं।
तुम्हारे बताने से पहले समझ गया था कि वो कार तुम्हारे पीछे लगी थी और स्कूटी भगाने के चक्कर में पहिया गड्ढे में गया और ट्यूब फट गया। मुझे आज भी तुम्हारी वो रीती हुई हिचकियां याद हैं। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरा बच्चा परेशान हो। हां, बच्चा ही तो कहता था न तुम्हें। बच्चा मानता भी था। तुम्हें दुनिया की हर नजर से बचा कर रखना चाहता था फिर बुरी नजर की क्या मजाल। उस दिन खुद को बहुत कोसा था कि हमेशा तो मैं तुम्हें छोड़ने जाता ही था क्यों नहीं गया उस दिन। तुम्हारे एक-एक आंसू का जिम्मेदार मैंने खुद को माना था। याद है तुमने रोते हुए मुझसे कहा था कि अब मैं उससे नहीं मिलूंगी मैं जब-जब उससे मिलती हूं हमारे साथ कुछ न कुछ बुरा जरूर होता है।
मुझे भी हमेशा यही डर लगता था। जब वो तुम्हारे नजदीक होती थी यकीन मानो मुझे डर लगता था। गोवा में तुमने हर रंग देखे थे, पर वक्त ने मुझे गलत साबित कर दिया। मैं तुम्हारी आंखों में आंसू कभी नहीं देख सकता था। मेरी बच्ची हमारी गुड़िया को भी मैं दुनिया की हर खुशी देता जो अगर कभी तुम्हारी कोख से जन्मती, पर तुममे मुझे वो बच्ची नजर आती थी, जिसपर अपना लाड़ दुलार हक चिंता सब जताता था। तुम्हें सुकून से घर पहुंचाकर पूरी रात मैं ठीक से सो नहीं पाया था, तुम्हारी आंसू भरी आंखों ने मेरे आंखों को भी नम कर दिया था।
जो उस दिन तुमने कहा था कि उससे मिलने पर कोई न कोई घटना होती ही है तो सोचो जरा मेरे न रहने पर उससे मिलने से और भी बड़ी घटना होनी ही थी। मेरे घर आते ही तुम्हारी और उसकी नजदीकी आ गई तो मुझे तो दूर हो ही जाना था। न न मैं उसे दोष नहीं दे रहा। सारा कसूर मेरा है, तुम्हें चाहने में कोई कसर मैंने ही छोड़ दी होगी, जो तुमने मुझे छोड़ दिया।
आज साथ नहीं हूं, पास नहीं हूं, पर मेरा दिल हमेशा ये चाहता है कि कभी तुम्हारे आंसू न निकलें और निकलें भी तो मैं रहूं तुम्हारे पास, तुम्हारा सिर मेरे ही कंधे पर ही ढुलके। मैं ही तुम्हें चुप कराऊं, फिर मैं तुम्हारे चेहरे को अपने हाथों में भरकर तुम्हारे माथे को चुमूं और तुम्हे बाहों में भरकर कहूं कि रोओ नहीं...मैं हूं ना
Tuesday, April 6, 2021
लघुकथा/...और रिश्ता सड़ गया !
‘तुम सिर्फ शादी चाहती हो ना?’
‘हां’
‘फिर तो खुश हो जाओगी’
‘देखो मुझे लगता था शादी बस साइन ही तो करना है, काम खतम, पर तुमसे जब मैंने कहा था उसी वक्त कर लेते तो मेरा दिल नहीं दुखता, तुम पर यकीन नहीं टूटता’
‘कुछ दिन पहले ही तो कहा है यार तुमने और मैंने मना भी तो नहीं किया, तुम जानती हो कि मैं शादी तुम्ही से करुंगा’
‘कर भी तो नहीं रहे’
‘करूंगा तो खुश हो जाओगी ना’
‘हां बहुत’
‘कुछ पूछ सकता हूं तुमसे’
‘हां, पूछो’
‘सच बताना शादी किसी जिद में तो नहीं कर रही हो’
‘नहीं’
‘फिर’
‘तुमसे प्यार करती हूं यार, तुम्हारे साथ रहना चाहती हूं हमेशा’
‘ओके, मुझे घर जाने से मना तो नहीं करोगी’
‘मेरी सभी जरूरतें पूरी होनी चाहिए बस, मुझे कोई दिक्कत नहीं होगी’
‘मेरी फैमिली बड़ी है मुझे निभाना भी पड़ेगा’
‘तुम्हारी फैमिली तुम निभाना मैंने कभी मना नहीं किया है और क्या जरूरत पड़ने पर मैंने निभाया नहीं है, तुम्हारे लिए, तुम्हारे प्यार की खातिर जमीन पर बैठकर पचीसों पराठे बनाए थे, मटर पनीर भी तो बनाया था ना तुम्हारे लिए उस गांव में, वैसे भी अपने रिश्ते खुद ही निभाए जाते हैं पुनीत’
‘हां, हां निभाती तो हो और तुम भूल गईं शायद तुम सो गईं थी, मैंने नींद में तुम्हे खिलाया था पर भूखा नहीं सोने दिया था’
‘पता है’
‘घर तो चलोगी न कभी कभी’
‘हमेशा तो नहीं जा पाउंगी’
‘वो तो मैं भी जानता हूं, पर छठे छमाही तो चलोगी ही ना’
‘हां, पर तुम मम्मी-पापा को यहीं ले आओ न’
‘यार वो यहां अभी नहीं रह पाएंगे, हमारी तुम्हारी शादी के बाद देखा जाएगा’
‘रह लेंगे, खाना भले ही ना बना पाऊं उनके लिए शायद, पर सब हो जाएगा’
‘चलो वो तो बाद की बात है एक बात और पूछूं’
‘हां बोलो’
‘मुझे छोड़कर कभी जाओगी तो नहीं?’
उधर से कोई जवाब नहीं आया
‘बोलो पलक तुम हमेशा मुझे छोड़कर जाने की बात करती हो और यही बात मुझे परेशान करती है हमेशा बताओ न मुझे जिंदगी में कभी छोड़कर जाओगी तो नहीं’
‘एक दिन मरकर अलग तो होना ही पड़ता है’
‘ये मुझे पता है, मैं जीतेजी की बात कर रहा हूं,इस जन्म में तुम मेरा साथ छोड़कर तो कभी नहीं जाओगी न’
‘नहीं, पर अगर हमारा रिश्ता सड़ा तो मैं नहीं रहूंगी’
‘जब सड़ेगा तब ना और मुझे खुद पर पूरा यकीन है कि मैं रिश्ते को कभी सड़ने ही नहीं दूंगा’
दो महीने भी तो बीते थे पलक और पुनीत के बीच हुए इस बातचीत को। एक- दूसरे से बेइंतहां प्यार करने वाले पलक और पुनीत ने खूबसूरत भविष्य के सपने के साथ एक दूसरे का हाथ थामा। प्यार करते ही थे, तकरार भी, फिर पता नहीं कैसे कुछ ही दिनों में गलतफहमियों की दीवार इतनी ऊंची हो गई कि विश्वास और प्यार की रोशनी उनके रिश्ते पर पड़नी बंद हो गई। मीलों की दूरियां दिलों की दूरियां कब बन गईं पता ही नहीं चला। उनके रिश्ते को न जाने किसकी नजर लग गई और उनका फला-फूला मुस्कुराता रिश्ता सड़ गया या शायद गलतफहमियों और अनजाने डर ने सड़ा दिया।
-धर्मेंद्र केशरी
Sunday, January 10, 2021
इश्क में Blame Game, Guilt और Regret
जब कोई जाने की सोच लेता है न
आपमें बेशुमार कमियां खोज लेता है
ऐसा जता देता है कि सारी ग़लती आपकी ही है
मन में अंदर तक भर देता है कि काश आपने वो बात न कही होती या
वो काम न किया होता
तो आज हमारा रिश्ता नहीं टूटता
छोड़ कर जाने वाला चला जाता है
पर आपके अंदर गहरा Guilt देकर जाता है
वो इसलिए कि आप ज़िंदगी भर Regret करें
और वो बड़ी आसानी से खुद को सही साबित कर आपके दिल को Guilt के बोझ से दबा देता है
ऐसा वो अपनी खुशी के लिए करता है
ताकि उसके मन में किसी तरह का अपराध बोध या Guilt न रहे
और वो आसानी से मूव ऑन कर सके
ये होता है Blame Game
सारी ग़लती आपकी निकाल कर आपको ज़िंदगी से निकाल देने का Blame Game
ताकि पूरी ज़िंदगी आप Regret करते रहें
रिश्तों में गलतियां कौन नहीं करता
उसने भी तो बहुत की होंगी
एक नहीं हज़ार की होंगी
पर आपने माफ कर दिया होगा
या भूल गए होंगे
क्योंकि चाहते हैं आप उन्हें
कभी खोना नहीं चाहते
प्यार के साथ एक बहुत बड़ी दिक्कत है
जिससे करो वो आपको नहीं करता
और जो करता है वो खामियां नहीं
सिर्फ खूबियों को देखता है
इस दौर में प्यार बड़ा प्रैक्टिकल हो गया है
और जो प्रैक्टिकल हो जाए वहां प्यार कहां
प्यार तो हमेशा दिल से होता है
दिमाग से बिज़नेस किया जाता है
तो कोशिश हो कि कोई ग़लती न हो
और हम इंसान हैं ग़लतियां करते आए हैं
आगे भी करेंगे
गलती को सुधारने का मौका दिया जाता है
Blame Game खेलकर किसी को ज़िंदगी से आउट नहीं किया जाता
पर दुनिया का रिवाज ही यही है मेरे दोस्त
जाने वाला अपने दिल का हर बोझ आप पर डाल कर जाता है
ताकि कोसते रहो खुद को
पूरी ज़िंदगी
जो गया उसे जाने दो
खेल लेने दो उसे Blame Game
बस तुम अपना मन देखो
अपनी सच्चाई पर Focus करो
और याद रखो छोड़कर वो गए हैं तुमको
तुम तो साथ रहना चाहते थे
कुछ गलतियां हुईं हैं तो उन्हें सुधारो
अपने लिए
उन्हें भी धन्यवाद दो हमारी ज़िंदगी का सबक देने के लिए
जैसे प्यार एकतरफा नहीं होता
वैसे ही गलतियां भी एकतरफा नहीं होतीं
हां, कुछ गलतियों की माफी नहीं होती
पर अगर सारा Blame वो तुम पर डाल कर जा रहे हों
तो मुस्कुराते हुए उन्हें जाने दो
क्योंकि वो अपनी कमियां, अपनी गलतियां आप पर थोंप कर जा रहे हैं
अपना ख्याल रखना
क्योंकि आपका ख्याल रखने कोई और नहीं आएगा
धर्मेंद्र केशरी Dharmendra Keshari
https://www.youtube.com/watch?v=7bfKnoSsmQM&pbjreload=101
Monday, November 23, 2020
#दिल की डायरी- पाती
पाती
वक्त तो अपनी रफ्तार से भाग रहा है, जैसे हमेशा भागता है...कल जब तुम्हारी उंगलियों को अपनी उंगलियों में पिरो रहा था...तब भी जानता था...वक्त भाग रहा है...वही मेट्रो, वही ऑटो और वही बिसलगढ़ी से पंचशील तक का सफर...जो पिछले एक महीने से कट रहा था...अब बदल गया है... तब वापस लौटते वक्त याद होती थी अब बेचैनी...अजीब सा डर...फिर भी लौटता हूं इस उम्मीद में कि इन उंगलियों को जिन्हें मैंने अपनी उंगलियों में पिरो रखा है...उन्हें जन्म-जन्मांतर के बंधन में बदल दूंगा...ये हौसला पहली बार आया है कि तुम्हें खुद से जुदा नहीं देख सकता...जानता हूं कि सोचती हो मेरे बारे में...ये भी कह देना चाहता हूं...जान लोगी क्या मेरी...एकाध फोन करके सांसें भर दिया करो... तुम्हारी आंखों को देखता हूं...छलक रहा होता है...दुनिया जिसे प्यार कहती है...हम क्या कहें? चलो नहीं देता कोई नाम...पर इतना तो कह ही सकता हूं कि ये जो एहसास है इसने मेरे मन के हर झरोखे, हर खिड़की, हर दरवाजे को खोल दिया है...रोशनी अब छनकर नहीं खुलकर अंदर आती है...अंदर का सीलन ताजा हवा के झोंके से मिट गया है...अभी फोन की घंटी घनघनाई...सोचा तुम हो...दिल का हाल अभी कह डालूंगा...पर तुम न थे...तुम्हारी आंखों को देखता हूं तो खो जाता हूं...डर भी जाता हूं...रहस्यमयी आंखें यूं ही उंगलियों को पिरोए दिल्ली की गलियां, नोएडा की सड़कें, गाजियाबाद के फुटपाथ ही नहीं...पूरी दुनिया के रास्ते तय करना चाहता हूं...जब तुम्हारे गालों को चूमता हूं तो समाज को अश्लीलता दिखती होगी...पर मेरे लिए वो पाकीजा लम्हा है...तुम्हारा अचानक चूमकर मुस्कुरा देना सिरहन पैदा कर देता है...तुम ऐसा ही तो करती आई...कब, क्या उम्मीद नहीं...पर अब उम्मीदें हैं...इतनी बड़ी की बयां नहीं की जा सकतीं...तुम्हारा बचपना, तुम्हारा बड़प्पन सब प्यारा है मुझे... बिना चश्मे के जब तुम देखती हो और मैं उंगलियों को बदल कर दिखाता हूं...तुमको पता भी नहीं चलता कि कितनी सफाई से मैं अपनी खुदगर्जी पूरा करता हूं...हां, तुम्हारे चेहरे पर जो खिलखिलाती हंसी आती है वही तो है उस खुदगर्जी का राज...देखो तुम बात कर लिया करो...सांस भर दिया करो...फोन को तो ऊर्जा मिल जाती है बिजली की या फिर जैसे भी...और मुझे? तुम जानती हो कि बिना तुम्हारे मेरी जिंदगी की बैटरी डाउन ही रहती है...यूं ही सही...पर एक बार मेरे लिए...फिर कहता हूं...जान लोगी क्या मेरी...एकाध फोन करके सांसें भर दिया करो...Sunday, August 2, 2020
...और छोटी वाली बुआ भगवान को प्यारी हो गईं
Monday, December 16, 2013
दूध के धुले लालू यादव!
धर्मेंद्र केशरी
Friday, March 29, 2013
Tuesday, January 11, 2011
Thursday, July 29, 2010
कहां से सीखी ये अदाएं
मेरे पास तो एक भी गर्लफ्रेड नहीं है ये संबोधन उनके लिए है, जिनके ब्वॉयफ्रेंड्स हैं और वो हैं उनकी गर्लफ्रेंड। सभी गर्लफ्रेंड्स से आज एक गुजारिश करना चाहता हूं। प्लीज कुछ बातों पर गौर फरमाया कीजिए। आप लोग किसी के आने-जाने, उठने-बैठने, करने-धरने से पहले टोंकाटाकी करती हैं तो वो आपकी केयरिंग होती है और बेचारे ब्वॉयफ्रेंड्स ने अगर ये पूछा-ताछी कर ली तो वो पजेशिव हो जाता है। एक ही मामले में ये दोहरा मापदंड क्यों अपनाती हैं आप लोग? फोन बिजी गया नहीं कि मेरी कसम बताना कौन थी फोन पर, भले ही बंदा अपने पापा से बात कर रहा हो। कसमें खा-खाकर सफाई देनी पड़ती है। नखरे, गुस्सा ङोलो वो अलग।
अगर कहीं मिस गर्लफ्रेंड्स का फोन बिजी गया और मिस्टर ब्वॉयफ्रेंड्स ने गलती से पूछ भर लिया कि किससे बात हो रही थी तो जमीन-आसमान एक। सीधा सवाब- तुम्हें मुझपर जरा भी भरोसा नहीं, शक करते हो मुझपर। फिर तो बंदे ने जो भुगतना है, उसी की आत्मा जानेगी। कहीं गलती से मिस्टर ब्यॉयफ्रेंड्स ने फोन छेड़ दिया तो कहानी खत्म और मोहतरमाओं का तो बंदे के फोन पर जन्म सिद्ध अधिकार है। डियर गर्लफ्रेंड्स, कुछ बंदे के भावों को भी तो समझा कीजिए।
प्यार की पटरी पर आ रही गाड़ी कब पटरी से उतर जाती है पता ही नहीं चलता। कभी-कभी तो चलती ट्रेन से मुसाफिर बिना बताए भी उतर जाता है। ओ के, दार्शनिक बातें नहीं..सीधे आपसे की जाने वाली गुजारिशों पर आते हैं। हां तो आप लोगों से जब तक मिस्टर ब्वॉयफ्रेंड्स शादी की बात पर नहीं आते हैं रिश्ते को आप सीरियसली नहीं लेती हैं। बंदा सीरियस हुआ नहीं कि इमोशनल अतयाचार शुरू। वैसे इमोशनल अत्याचार का गुर आपको किस गुरु भाई या गुरु मां ने सिखाया है? प्लीज बताएं, बेचारे ब्वॉयफ्रेंड्स को भी उसी गुरुकुल में भेज दिया जाए ताकि वो आपके प्यार भरे अत्याचारों का उसी अंदाज में जवाब दे सकें। जब मिस्टर ब्वॉयफ्रेंड्स मिस गर्लफ्रेंड्स से शादी जसे गंभीर मसले पर बात करते हैं तो शुरू होती है असली महाभारत। गर्लफ्रेंड्स जी, प्लीज ये बताएं कि प्यार-व्यार के झमेले में डालने से पहले आप एक कमरे का घर, एक थाली और एक कटोरी में भी गुजारा करने की बात करती हैं।
बंदे का जेब और जेब खर्च भी बखूबी जानती हैं और उसी में खुद को सेट कर लेने का हवाला देती हैं, पर बाद में आप स्टेसस का हवाला क्यों देती हैं। फिर आपको अपने मौसी के दामाद जसे पैसेवाले पति की दरकार होने लगती है और प्यार भिखमंगा और नंगा नजर आने लगता है। एक बात और..मिस्टर ब्वॉयफ्रेंड्स आपके नखरे उठाने के लिए उधारी मांगते फिरते हैं, प्लीज इतनी महंगाई और रिसेशन के टाइम में थोड़ा कंसेशन दे दिया कीजिए। बाकी क्या कहें, करना वही है जो आपका मन करेगा। नमस्ते।
धर्मेद्र केशरी
Friday, May 28, 2010
डर लगता है..
आज पाने से डर लगता है..
तन्हा होने से डरता था
अब महफिल से डर लगता है..
कभी सब कुछ कह जाता था तुम्हें
आज लब खोलने से डर लगता है..
पास आने की जिद थी कभी
अब तो पास आने से ही डर लगता है..
गुजरती सांसों पर नाम था तेरा
अब तो सांस लेने से ही डर लगता है..
तेरे सजदे में झुकाते थे सिर कभी
मांगा करते थे दुआओं में
खुदा बन गए थे तुम मेरे
अब रब से नजरें मिलाने में डर लगता है..
प्यार इस कदर किया तुझको
कि भूल गए सारा जमाना
ताश के पत्तों से बिखरा वहम मेरा
अब वफा के नाम से भी डर लगता है..
फख्र था जिंदा मुहब्बत पर अपनी
उस मुहब्बत की लाश उठाने से डर लगता है..
किसी अपने ने किया दिल पर ऐसा वार
अनजानों को कहना ही क्या
पहचाने चेहरों से भी डर लगता है..
चाह कर भी नहीं होता किसी पर भरोसा
अब तो यकीं के नाम से ही डर लगता है..
चाहतों की चाह में खाया है धोखा
अब चाहतों को चाहने में डर लगता है..
सोचता हूं पूछूं कई सवाल
प्यार था या था मजाक तेरा
दिल में उतर के किया क्यों दिल से दूर
जवाब दोगे कि नहीं, डर लगता है..
तेरी यादों से लिपटकर जिंदा हैं
छीन न लो यादों को भी, डर लगता है..
बड़ी मुश्किल से साहिल पर आई है कश्ती
अब तो मझधार में जाने से डर लगता है..
कभी तुम्हें खोने से डरता था
आज पाने से डर लगता है..
धर्मेद्र केशरी
Friday, April 23, 2010
कोई कुछ भी कहे, फर्क नहीं पड़ता- पायल रोहतगी
पायल रोहतगी। हैदराबाद में जन्मी और मिडिल क्लास से संबंध रखने वाली इस बाला के बारे में किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि इतने कम समय में अपने दम पर वो इस मुकाम पर पहुंच जाएंगी। बॉलीवुड में उनका कोई गॉड फादर नहीं, फिर भी वो इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान के साथ कायम हैं। उन्हें सेक्सी, ग्लैमरस या हॉट हीरोइन कहलाने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। पायल को फिल्म इंडस्ट्री की हकीकत पता है और वो प्रैक्टिकली इस सच को स्वीकार भी करती हैं। बिना किसी सपोर्ट के वो अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुई हैं। पायल का फैमिली बैकग्राउंड एकेडमिक है, लेकिन मिस इंडिया प्रतियोगिता में भाग लेने के बाद उनका रुझान पूरी तरह से ग्लैमर वर्ल्ड की ओर हो गया। उन्होंने खुद कंप्यूटर इंजीनियरिंग का कोर्स किया है। पायल हिम्मत हारने वालों में नहीं हैं। अपनी जिंदगी से जुड़ी कई बातों को पायल ने बेबाकी से बयान किया। पेश है धर्मेद्र केशरी की पायल रोहतगी से हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
आपकी इमेज सेक्सी और ग्लैमरस अभिनेत्री की बनी हुई है, इस इमेज से कोई परेशानी नहीं होती?
देखिए, इस इंडस्ट्री में मेरा कोई गॉड फादर नहीं है। न ही मैं सलमान खान की गर्लफ्रेंड हूं और न ही अनिल कपूर की बेटी। कहने का मतलब ये कि बॉलीवुड में ब्रेक पाने के लिए मैंने एक्सपोज का सहारा लिया, इसे मैं कबूल भी करती हूं और सच कहूं तो मुङो इस बात का कतई मलाल नहीं है। मुङो इमेज से कोई फर्क नहीं पड़ता। आपको काम करना है और हर तरह के रोल करने पड़ते हैं। मैंने भी किया है। मेरा काम अभिनय करना है और मैं सिर्फ इस पर ही अपना ध्यान केंद्रित करती हूं, बेवजह की बातों पर ध्यान नहीं देती।
अपनी प्रोफेशनल लाइफ से कितनी खुश हैं?
सबसे पहले मैं बता दूं कि मैं टूटने वाली लड़की नहीं हूं। संघर्ष करना जानती हूं और विपरीत परिस्थितियों में भी अपने आपको संभालना जानती हूं। मैंने भी अच्छी-बुरी फिल्में की हैं और हर कोई अनुभव से ही सीखता है। हर किसी की अपनी किस्मत होती है। दीपिका पादुकोण की अपनी किस्मत है, जो आते ही शाहरुख खान के साथ फिल्म पा गईं। मुङो किसी बात का दुख नहीं है, बल्कि मैं अभी सीख ही रही हूं।
बिग बॉस से आपको कितना फायदा पहुंचा?
बिग बॉस देश का बड़ा रियलिटी शो है और कोई दो राय नहीं कि इस शो से मुङो भी फायदा पहुंचा है। ये बहुत बड़ा प्लेटफॉर्म है। लोग सीधे आपसे जुड़ते हैं। आपकी असली शख्सियत का पता चलता है। शो करने के बाद कम से कम मुझ पर आइटम डांसर का लगा ठप्पा मिट गया। यकीनन शो ने मुङो फायदा पहुंचाया है।
क्या अभी भी कोई रियलिटी शो करने जा रही हैं?
बिग बॉस से बड़ा शो तो फिलहाल कोई नहीं है, इससे बड़ा कोई शो आएगा तो जरूर करूंगी। रही बात किसी अन्य शो में पार्टिसिपेट करने की, तो ऑफर तो मिलता रहता है, पर शो भी तो अच्छा होना चाहिए। हाल ही में मुङो देसी गर्ल के लिए ऑफर आया था, पर मुङो ठीक नहीं लगा। हां, अगर कांसेप्ट अच्छा रहे तो मैं दोबारा रियलिटी शो जरूर करना चाहूंगी।
मान लीजिए, सच का सामना आपको होस्ट करना पड़े तो?
होस्ट करने की बात होगी तो मुङो शो से इनकार नहीं है, लेकिन अगर शो में खुद से जुड़े राज दुनिया के सामने जाहिर करने वाली बात हो तो मैं कभी नहीं करूंगी। मैं उस तरह की लड़की नहीं हूं, जो अपनी निजी जिंदगी, पारिवारिक बातों को भी दुनिया के सामने जाहिर कर दे।
आजकल बेबाक बयान शॉर्टकट का जरिया बन चुका है, कश्मीरा शाह, संभावना सेठ जसी हीरोइनें अपनी बेबाकी से अटेंशन क्रिएट करती हैं। इस पर आपका क्या कहना है?
मेरा इन लोगों से कोई मतलब नहीं है और न ही मैं इनके बारे में कुछ जानती हूं, इसलिए कोई टिप्पएाी नहीं करना चाहूंगी। मैं इन लोगों से अपनी तुलना भी नहीं करना चाहती। जिसको जो करना है करे, मैं सिर्फ अपने बारे में जानती हूं।
कोई खास रोल, जो आप करना चाहती हों?
ऐसा कोई खास ड्रीम रोल नहीं है। मैं यहां सिर्फ अभिनय करना चाहती हूं। तरह-तरह के बेहतरीन किरदारों को निभाने की ख्वाहिश है। मैं सिर्फ फिल्में ही नहीं, थिएटर पर भी अपना ध्यान केंद्रित कर रही हूं। हाल ही में थिएटर के कई वर्कशॉप भी मैंने अटेंड किए हैं। मेरे कहने का मतलब ये है कि यहां मैं काम करने आई हूं और यही चाहतर हूं कि पायल की पहचान भी सिर्फ उसके अभिनय और काम से हो।
आपका एकेडमिक बैकग्राउंड है, खुद आपने कंप्यूटर इंजीनियरिंग की है, ऐसे में हीरोइन बनने का ख्याल कैसे आया?
जी हां, मेरी मम्मी टीचर हैं, पापा भी जॉब में हैं। घर में इंजीनियरों की भरमार है, फिर भी मैंने ग्लैमर वर्ल्ड चुना। ये मेरी पसंद थी। मम्मी-पापा ने मुङो वही करने दिया, जो मुङो अच्छा लगता है। मैं अपने कॉलेज में सबसे लोकप्रिय लड़की थी। ईश्वर की कृपा से सुंदरता और लंबाई मुङो मिली ही है। कॉलेज में सबकी पसंद मैं हुआ करती थी। शोज वगैरह में भी भाग लेती थी। उसी दौरान मैंने फेमिना मिस इंडिया में पार्टिसिपेट किया और मुंबई आना हो गया।
फिलहाल क्या कर रही हैं?
जल्द ही एक फिल्म की शूटिंग शुरू होने जा रही है। फिल्म में मैं एक जर्नलिस्ट का किरदार निभा रही हूं। अभी फिल्म के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बता सकती, पर जल्द ही मैं इससे जुड़ी जानकारी आपको दूंगी। वैसे फिल्म की शूटिंग जुलाई-अगस्त तक शुरू हो जाएगी। इसके अलावा कुछ शो भी कर रही हूं।
पायल शादी कब कर रही है?
फिलहाल तो नहीं, क्योंकि मेरा मिस्टर राइट अभी मिला ही नहीं है, जिस दिन मिलेगा शादी भी कर लूंगी।
कैसे हमसफर की तलाश है?
स्मार्ट और हैंडसम तो हो ही, उसे पारिवारिक जिम्मेदारियों की भी समझ हो। मुङो समझने वाला हो, जो कभी किसी चीज के लिए रोक टोक न लगाए। मुङो प्रेरित करे, पर सच कहूं तो ऐसे लड़के मिलते कहां हैं। या तो संकीर्ण मानसिकता के लड़के मिलते हैं या गे (समलैंगिक)।













